चीकू की उन्नत खेती के लिए पौध संरक्षण

Date : 25.April.2019
कीट प्रबंध चीकू का पतंगा इस पतंगे की पहली जोड़ी के पंखों का रंग काला होता है तथा आधे भाग पर पीले रंग के धब्बे होते हैं। इसकी लट्टो का रंग गहरा गुलाबी होता है तथा पूरे शरीर पर लंबे काले रंग की धारियां होती है। यह कीट पतंगों का गुच्छा बनाकर उसमें रहता है। पत्तियों, कलियों एवं नए पौधों में छेद करके नुकसान पहुंचाता है। नियंत्रण हेतु क्यूनालफॉस (25 ई.सी.) 2.0 मिलीमीटर या मोनोक्रोटोफॉस (36ई.सी.) 1.0 मिलीलीटर प्रतिलीटर पानी की दर से छिड़काव करें। आवश्यकतानुसार यह छिड़काव 15 दिन के अंतराल पर दोहरावें। थ्रिप्स यह कीट बहुत छोटे आकार के काले रंग के होते हैं। यह कोमल तथा नई पत्तियों का हरा पदार्थ खुरचकर खाते हैं जिससे पत्तियों पर सफेद धब्बे दिखाई देने लगते हैं। पत्तियां पीली पड़कर सूख जाती है। नियंत्रण हेतु पौधों पर फॉस्फोमिडॉन (85 एस.एल.) 0.5 मिलीलीटर या डाईमिथोएट (30 ई.सी.) 1.5 मिलीलीटर या इमिडाक्लोरोपीड 1 मिलीलीटर प्रति 3 लीटर या मोनोक्रोटोफॉस (36 एस.एल.) 1 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी के हिसाब से छिड़काव करें। व्याधि प्रबंधन पट्टी धब्बा रोग इस रोग के प्रकोप से पत्तियों पर छोटे-छोटे धब्बे बन जाते हैं। उनकी वजह से उपज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। नियंत्रण हेतु जाइनेब 2 ग्राम प्रति लीटर पानी के हिसाब से छिड़काव करना चाहिए। यदि आवश्यक हो तो यह छिड़काव 15 दिन बाद दोहरावें। शाखाओं का चपटा होना यह समस्या कवक से होती है तथा रोग से प्रभावित वृक्षों की शाखाएं चपटी हो जाती है ऐसी शाखाओं को जला देना चाहिए।